Agniveer Amritpal Pal Singh की शहादत पर आक्रोश !

Agniveer Amritpal Pal Singh

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले
वतन पे मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा ….।
जब ये पंक्तियां किसी भारतवासी के कानों में जाती हैं तो उसका रोम रोम देशभक्ति से भर जाता है और देश के लिये मर मिटने का जो जज्बा उसकी रगों में उमड़ता है, उसे शब्दों में बयान कर पाना नामुमकिन है लेकिन भारत सरकार के अग्निवीर अमृतपालसिंह Agniveer Amritpal Pal Singhकी शहादत पर सियासतदानों ने जैसी बेरूखी दिखाई है उससे देश के तमाम नौजवानां का एकबारगी दिल टूट सा गया है। बताते चलें कि पंजाब निवासी अमृतपाल सिंह जम्मू और कश्मीर के पुंछ में तैनात थे और पुंछ जिले के मेंढर उपमंडल के मनकोट इलाके में एलओसी के पास उनकी ड्यूटी थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार नियंत्रण रेखा के पास अग्निवीर अमृतपाल सिंह की गोली लगने से मौत हो गई। अमृतपाल सिंह की उम्र महज 20 साल के लगभग थी। बताया जा रहा है कि वक्त घटना Agniveer Amritpal Pal Singh संतरी ड्यूटी पर था। मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि घटना का संज्ञान लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है।

वाकई बहुत शर्म की बात है

दुःख की बात है कि यह घटना भारत के प्रथम अग्निवीर की शहादत पर घटी। वह पंजाब में जिले मानसा से थे। Agniveer Amritpal Pal Singh केवल 19 साल के थे और दिसंबर 2022 में अग्निवीर में भर्ती हुए थे। उनकी ड्यूटी जम्मू.कश्मीर में थी। दुर्भाग्यवश इस बुधवार को पुंछ  जम्मू कश्मीर में एलओसी के पास ड्यूटी के दौरान वह शहीद हो गए। यह दुखद है कि उनके शव को उनके परिवार वाले सेना के वाहन से नहीं बल्कि निजी एंबुलेंस से गांव लाए थे। उनके दाह संस्कार के समय सेना की कोई इकाई मौजूद नहीं थी और उन्हें सेना का कोई गार्ड ऑफ ऑनर भी नहीं दिया गया। ग्रामीणों के अनुरोध पर स्थानीय पुलिस ने हमारे बहादुर जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मोदी सरकार की नई अग्निवीर नीति के कारण सेना की कोई भी इकाई अमृतपाल पाल सिंह के पार्थिव शरीर को गांव नहीं लायी और न ही सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। यदि नीतिगत बात वास्तव में सच है तो यह सरकार का शर्मनाक कृत्य है। सरकार को हमारे शहीदों के साथ ऐसा व्यवहार बंद करना चाहिए और देश के लिए लड़ने वाले प्रत्येक सैनिक को उचित और सम्मानजनक सेना गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान करना चाहिए। ये वाकई बहुत शर्म की बात है।

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