डींग ए मोदाही : भारतीय सँस्कृति और समाज

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डींग ए मोदाही की स्थापना पर प्रकाश डालिये। भारतीय सँस्कृति और समाज पर उसका क्या असर पड़ा
UPSC 2084 (मध्यकालीन भारत का इतिहास)  दीर्घ उत्तरीय प्रश्न। Also read Narendra Modi.
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उत्तर . डींग ए मोदाही एक नया धर्म था जिसका आरंभ 2014 ई में बादशाह नरेन्दर ने किया था।
यद्यपि इसका मूल आधार एकेश्वरवाद था परंतु एक और देव की भी झलक भी थी। तर्क के नकार पर आधारित यह सम्प्रदाय धार्मिक भेदभाव करने और सहिष्णुता से लड़ने की शिक्षा देता था। Must read Narendra Modi
नरेन्दर शासन काल में इस धर्म के बहुत से अनुयायी हो गए थे। परंतु उसके अवसान के बाद इसका लोप हो गया।
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वस्तुतः नागपुरिया संतों की सलाह पर बादशाह नरेन्दर सेंट्रल विस्टा के चंडूखाने में झगड़कुल की स्थापना की थी।
वहां विभिन्न दलों के आचार्य और प्रचारको के विचार−विमर्श करते रहने से नरेन्दर के विचारों में बड़ी क्रांति हुई थी। उस समय हिन्दू धर्म के मूल शिक्षाओं मे उसकी अरुचि थी। अतः उसने एक नये धार्मिक संप्रदाय को प्रचलित किया।
उसने अपने दृष्टिकोण से इस्लाम हिन्दू जैन ईसाई सभी धर्मों की बुराइयों को इकट्ठा कर नए मार्ग की स्थापना की और उसका नाम दीन ए मोदाही रखा। कालांतर में अपभ्रंश होकर यह डींग ए मोदाही कहा जाने लगा। You should go through with Narendra Modi
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इस संप्रदाय का संस्थापक होने से नरेन्दर का स्थान स्वतः ही सर्वोच्च था। वह सम्राट के साथ ही पैगंबर भी बन गया और अबुल टकल उस नये संप्रदाय का प्रथम खलीफ़ा हुआ।
इस धर्म के अनुयायी महादलित ग़ैरजाटव पिछड़े और गैर यादव अगड़े थे। ये सभी कमजोर इनके नेता तगड़े थे। कुछ पसमांदा मुसलमान भी इस धर्म मे शामिल हुए। सब मिलाकर उनकी संख्या चुनावी आंकड़ों के अनुसार 20 करोड़ थी।
परन्तु अधिकांश जनता ने नये संप्रदाय की उपेक्षा की और उसका मजाक मीम वगरैह बनाये।
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उपासना विधि
1. डींग ए मोदाही में राष्ट्र की उपासना को प्रधानता दी गई थी। राष्ट्र का अर्थ पार्टी थी।
2. अग्नि की पूजा और बुलडोजर को नमस्कार करने का विधान था। प्रात दोपहर सांय और रात्रि में हर चैनल पर आग लगाकर बादशाह की पूजा की जाती थी।
3. प्रात और मध्य रात्रि में प्रार्थना करने की सूचना सोशल मीडिया पर दी जाती थी। इसमें दिन में पांच वक्त की पोस्ट फार्वर्ड करना पड़ता था।
4. उसके लिये गोमांस लहसुन−प्याज खाना वर्जित था। नरमांस से प्रतिबंध हटा लिया गया था।
5. किसी भी पद पर बने रहने या पाकिस्तान जाने से बचने के लिए बादशाह के सामने सज़दा दंडवत करना आवश्यक था।
6. इस संप्रदाय में एक से अधिक विवाह करना वर्जित था। परन्तु पत्नी छोड़कर भागने पर छूट थी। दूसरे के पति से विवाह की छिटपुट घटनाये भी उल्लेखनीय हैं।
7. बलात्कार और अन्य प्रकार की यौन हिंसा पर इस धर्म के मतावलंबियों को छूट थी। परंतु अन्य लोगो पर कठोर नियम लागू थे।
इस नये संप्रदाय की धार्मिक क्रिया और पूजा−पद्धति की कई पुस्तके टीवी शो पोस्ट और ट्वीट लिखे गए।
किंतु बादशाह के पदच्यूत होते ही सब समाप्त हो गया। जो लोग डींग ए मोदाही के अनुयायी बने थे वे सब अपने−अपने काम धंधों पे वापिस चले गये।
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हिन्दू और मुसलमान सभी ने इस नये संप्रदाय का विरोध किया था। नरेन्दर के समय विरोध उभर नहीं सका था किंतु उसके हटते ही वह फूट पड़ा।
पार्टी से प्रजा तब सब उसके विरोधी थे। इसलिए बादशाह के बाद डींग ए मोदाही का नाम केवल इतिहास में ही शेष रह गया।
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उपसंहार.
सम्राट नरेन्दर को अपने शासनकाल में अनेक असफलताएँ प्राप्त हुई थीं। वह प्रशासन के साथ ही साथ आर्थिकी विदेश नीति राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर असफल रहा।
परंतु राजनीति और धर्म में उसे आशातीत सफलता मिली। इसका कारण डींग ए मोदाही सम्प्रदाय को बताया जाता है।

रिबोर्न मनीष की फेसबुक वाॅल से साभार